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DAVV में नए कोर्स, सीटें और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर
कार्यपरिषद सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कहा—डिमांड बेस्ड पाठ्यक्रमों के साथ स्मार्ट क्लासरूम और मल्टी स्टोरी अकादमिक बिल्डिंग समय की जरूरत
इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में विद्यार्थियों की बढ़ती मांग और बदलती शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप नए पाठ्यक्रम, सीटों में वृद्धि और आधुनिक शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कार्यपरिषद सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के विकास को लेकर अपने सुझाव रखे।
Performing Arts विभाग की स्थापना पर कुलगुरु को धन्यवाद
डॉ. द्विवेदी ने विश्वविद्यालय में हाल ही में स्थापित किए गए Performing Arts विभाग का विशेष रूप से स्वागत करते हुए कुलगुरु का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि Performing Arts विभाग की स्थापना के लिए उन्होंने स्वयं पत्र लिखकर प्रस्ताव रखा था और उनके पत्र पर विश्वविद्यालय द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग की स्थापना की गई।
उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि इस नए विभाग को लेकर इंदौर शहर में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और विभिन्न वर्गों के लोगों ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना की है।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय में समय की आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप नए विभाग एवं पाठ्यक्रम प्रारंभ करना DAVV को और समृद्ध बनाएगा। उन्होंने इस पहल के लिए कुलगुरु को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्कूल ऑफ आयुष के लिए दिल्ली में प्रयास
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय में School of AYUSH की स्थापना के प्रस्ताव को लेकर कुलगुरु के साथ दिल्ली जाकर भी प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगभग ₹700 करोड़ के विकास प्रस्ताव के साथ AYUSH से संबंधित शैक्षणिक एवं संस्थागत विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि School of AYUSH की स्थापना DAVV को आयुष शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला सकती है। विश्वविद्यालय में आयुष से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों और शोध गतिविधियों के विस्तार की भी संभावनाएं इससे बढ़ेंगी।
डॉ. द्विवेदी ने दिल्ली में खराब मौसम और भारी वर्षा के बावजूद समय पर पहुंचकर इस प्रयास में सहभागी होने के लिए कुलगुरु को साधुवाद एवं धन्यवाद दिया।
डिमांड बेस्ड पाठ्यक्रमों पर जोर
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि BALLB, B.Com (Hons.), MBA Finance, MBA Marketing, MBA HR, Integrated MBA तथा IET में B.Tech के CS, IT एवं Civil जैसे पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की मांग यह दर्शाती है कि रोजगारपरक और आधुनिक पाठ्यक्रमों की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।
Integrated MBA में शुरुआत में ही सीटें भर जाना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसे Demand Based, Skill Based एवं Employment Oriented Courses लगातार प्रारंभ करने चाहिए।
डिमांड के अनुरूप बढ़ें सीटें और इंफ्रास्ट्रक्चर

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी पाठ्यक्रम में उपलब्ध सीटों से कई गुना अधिक विद्यार्थी प्रवेश चाहते हैं, तो विश्वविद्यालय को सीटें बढ़ाने के साथ-साथ आवश्यक infrastructure भी विकसित करना चाहिए।
विद्यार्थी उपलब्ध हैं, पाठ्यक्रम की मांग है और रोजगार की संभावनाएं हैं—अब infrastructure को उसी अनुरूप बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने सुझाव दिया कि नए Smart Classrooms, आधुनिक Academic Buildings और Multi-storey Academic Buildings की चरणबद्ध योजना बनाई जाए।
₹50 से ₹100 करोड़ के निवेश से मजबूत हो सकता है अकादमिक इंफ्रास्ट्रक्चर
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में लगभग ₹50 से ₹100 करोड़ के चरणबद्ध निवेश से आधुनिक अकादमिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाता है तो इसे केवल खर्च नहीं, बल्कि दीर्घकालीन Educational Investment के रूप में देखा जाना चाहिए।
इससे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ विश्वविद्यालय की क्षमता और आय दोनों में वृद्धि हो सकती है।
संवाद से मजबूत होगा विश्वविद्यालय परिवार
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास के लिए कुलगुरु, कुलसचिव, विभागाध्यक्षों, निदेशकों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और कार्यपरिषद सदस्यों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बेहतर communication mechanism से समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सकता है और अच्छे सुझावों को तेजी से लागू किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय परिवार के बच्चों के हित में भी विचार
उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारियों को विश्वविद्यालय परिवार का अभिन्न हिस्सा बताते हुए उनके बच्चों के लिए उपलब्ध प्रवेश संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पुराने विश्वविद्यालय निर्णयों एवं नियमों की समीक्षा कर नियमसम्मत, पारदर्शी और उचित व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
ऐसा लक्ष्य हो DAVV को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाना
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास का लक्ष्य विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराना, नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करना, सीटें बढ़ाना, आधुनिक कक्षाएं विकसित करना और शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण तैयार करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति की आलोचना करना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय को और मजबूत बनाना है। निर्णय संवाद से हों, विकास योजना से हो और संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता के साथ हो—इसी सोच के साथ DAVV को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठित बनाया जा सकता है।”


